कण कण में व्याप्त मैं भी

कण कण में व्याप्त मैं भी, तेरे संग

गुफाओं में, हवाओं में, तेरे संग
सागर में, शिलाओं में, तेरे संग
शरीर की शिराओं में, तेरे संग
केश कोशिकाओं में, तेरे संग

कण कण में नर्तन करती, तेरे संग

पतन में, उत्थानों में, तेरे संग
आंधी औ तूफानों में, तेरे संग
कीचड़ खलिहानों में, तेरे संग
मनुष्य की मुस्कानों में, तेरे संग

कण कण में व्याप्त मैं भी, तेरे संग

दर्द हाहाकारों में, तेरे संग
घोर अन्धकारों में, तेरे संग
कुन्ठित व्यापारों में, तेरे संग
प्यार के व्यवहारों में, तेरे संग

कण कण में नर्तन करती, तेरे संग

फूलों में, पत्तियों में, तेरे संग
वाणी में खामोशीयों में, तेरे संग
ब्रह्म ज्योति रश्मियों में, तेरे संग
प्रलय और सृष्टियों में, तेरे संग

कण कण में व्याप्त मैं भी, तेरे संग

one word poem

एक शब्द की कविता
तुम.

एक शब्द में पृथ्वी सारी
तुम
एक शब्द में सृष्टि सारी
तुम

क्या रिश्ता होगा जब तुम ही हो
यह वाणी तेरी

– तुम

a one word poem
you.

in one word
entire earth
you

in one word
the universe
you

relationship?
not possible
when there’s only one-
you

this voice is yours

~ you


Image credit: American Astronomical Society

अगर सुनो तो

in the silence - michael z tyree

तारे जड़े हैं ज़िन्दगी में
अंधियारे बिछे हैं ज़िन्दगी में
और साँसों की लहर
सहला जाती है …
अगर सुनो तो

~ वाणी मुरारका

इस कविता का अंग्रेज़ी में अनुवाद (मेरे ही द्वारा):

stars are studded
in our life
darkness laid out
in our life

and the gentle flow
of breath,
ever soothing…
if you hear it

Image Credit: In The Silence – pastel painting by Michael Z Tyree. You can view the full painting and purchase prints here.

नाँव एक विचार की

नाँव एक विचार की
और लय पतवार सी
ऐसी कोई रचना हो
जीवन धारा पर बहती

अनहद से भरी हुई
शब्दों से जुड़ी हुई
ऐसी कोई रचना हो
जीवन धारा पर बहती

नभ मण्डल में

नभ मण्डल में बड़ी छटा सी
पंख खोल कर उड़ान भरती
ईश्वर के वाहन का वैभव
उसके अंतस में पलता है

एकल जीवन बीच सभी के
दिशाहीन सी लगती तो है
आज वही करना है जो वह
कह दें उसी दिशा मुड़ना है
क्या बन जाए पता नहीं है
बस विश्वास दीप जलता है

उठ चल दिन आरम्भ करें फिर
देखें इस दिन क्या घटता है
ईश्वर के वाहन का वैभव
मेरे अंतस में पलता है

अदृश्य दृश्य

मेरे प्यारे डिजिटल जगत के लिए –

नम्बर कई मिले
मिलनाम्बर में
उनमें थे
न कोई गिले
पर बचे
शून्य एक
ही रहे
अदृश्य दृश्य
से सब बने
नम्बर कई
फिर मिल गए

~ वाणी मुरारका

मिलनाम्बर: मिलन का अम्बर – अर्थात इन्टरनेट

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चित्र सौजन्य: pixabay.com

शिव तुमको ही अर्पित हूँ –

शिव तुमको ही अर्पित हूँ मासूम सुमन भोली सी
ब्रह्मांगन में तेरे अब मां खेलूं मैं हिरणी सी

श्री-उपहार नए जीवन का, प्रेम-सुधा वरदान
उर में सतरंगी सुख लाया तेरा वीर्य महान

मधु-कली सी वाणी मेरी हरित करे जन मन को
वसुन्धरा पर माँ अब तेरे दे दूँ मैं तन मन को

तेरा हाथ पकड़ चलना है ओ मेरे रखवारे
पथ आलोकित करते चलना सत्-करुणा उर वारे

~ वाणी मुरारका

brahmaangan

ब्रह्मांगन में तेरे अब मां खेलूं मैं हिरणी सी